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मॉनसून के सीजन में सतानेवाली बीमारियां और इनसे बचाव

मॉनसून यानी रिमझिम बारिश का मौसम। कब झमाझम बारिश होने लगेगी और कब तल्ख धूप खिलेगी, कुछ नहीं कहा जा सकता। पल में तोला पल में माशा वाली स्थिति होती है मौसम की। …और पल-पल बदलता ये उमस वाला मौसम हमारी सेहत का भी कुछ ऐसा ही हाल कर देता है। कभी बदन दर्द तो कभी खांसी-जुकाम जैसी दिक्कतें लगी ही रहती हैं। और भी नहीं तो थकान ही इतनी अधिक हो जाती है कि शरीर टूटने लगता है। बस एक बार जहां शरीर कमजोर पड़ा तुरंत कोई ना कोई मौसमी बीमारी जकड़ लेती है। आइए, यहां जानते हैं मॉनसून के सीजन में सतानेवाली बीमारियों और इनसे बचाव के बारे में…

शुरुआत घर के बच्चे से करते हैं
बरसात के मौसम में बच्चों को जो बीमारियां सबसे अधिक घेरती हैं उनमें कफ और कोल्ड के बाद सबसे अधिक केस निमोनिया के देखने को मिलते हैं। ये सभी दिक्कतें आमतौर पर तभी होती है, जब बच्चे बारिश में भीग जाते हैं और घंटों तक उन्हीं गीले कपड़ों में मस्ती करते रहते हैं।

क्या होता है निमोनिया?
बच्चों को कोल्ड और कफ होना आम बात है लेकिन जब इन दिक्कतों के साथ बुखार हो, खांसी के साथ कफ आए और बच्चे को सांस लेने में दिक्कत हो तब आपको अधिक सतर्क हो जाने की जरूरत है। क्योंकि ये सभी निमोनिया के लक्षण हैं।

सीजनल फ्लू
बारिश के मौसम में सीजनल फ्लू होना आम बात है। यह किसी भी उम्र के लोगों को हो सकता है। इसका मुख्य कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता का कम हो जाना, बारिश में भीगना, ज्यादा देर तक गीले कपड़ों में रहना, मौसम के विपरीत खान-पान करना, रात के समय फ्रिज में रखे फूड्स को ठंडा ही खा लेना, जैसे कई बहुत सामान्य-से लगनेवाले कारण शामिल हैं।

फ्लू के लक्षण?
सीजनल फ्लू में खांसी, बुखार, सांस लेने में दिक्कत, गले में जलन, सीने में भारीपन और खांसी के साथ कफ आने जैसी दिक्कतें होती हैं। जरूरी नहीं है कि हर मरीज में ये सभी लक्षण नजर आएं या ये सारे लक्षण एक साथ में नजर आएं।

मलेरिया के लक्षण और कारण
बरसात के मौसम में मच्छरों के कारण फैलनेवाली बीमारियों में मलेरिया बड़े स्तर पर फैलता है। इसलिए इस मॉनसून में मच्छरों से बचकर रहना चाहिए।

मलेरिया के लक्षण
जब किसी व्यक्ति को मलेरिया वायरस कैरी करनेवाला मच्छर काट लेता है, उसके कुछ हफ्ते के अंदर यह बीमारी असर दिखाना शुरू करती है। मलेरिया के रोगी को बुखार आना और बुखार में ही पसीना आना, शरीर में दर्द रहना और रह-रहकर उल्टी आना जैसी दिक्कतें शामिल हैं।

डेंगू भी डराता है
मॉनसून के सीजन में डेंगू फीवर का होना बहुत ही सामान्य लेकिन गंभीर बीमारी होती है। खासतौर पर उस स्थिति में जब रोगी की सेहत को लेकर जरा-सी भी चूक हो जाए। डेंगू का रोग भी मच्छरों के काटने से ही होता है। खास बात है यह कि जिन एडीज मच्छरों से यह रोग होता है, वह दिन के समय में ही काटते हैं और साफ पानी में पनपते हैं।

डेंगू के लक्षण
डेंगू के मच्छर द्वारा काटे जाने पर 3 से 5 दिन के अंदर ही व्यक्ति में इस बीमारी के लक्षण दिखने लगते हैं। संक्रमित व्यक्ति को तेज बुखार आता है, बुखार के साथ बहुत अधिक सर्दी लगती है, हड्डियों और जोड़ों में दर्द होता है, आंखों में तेज दर्द और चुभन होती है। इस रोग में प्लेटलेट्स बहुत तेजी से गिरने लगती हैं। यदि समय पर रोगी को सही इलाज ना मिले तो जान तक जा सकती है।

मॉनसून में होनेवाले हर तरह के बुखार और फ्लू से बचने के लिए कुछ जरूरी बातों पर ध्यान देना चाहिए। जैसे…

कहीं बाहर जाते समय इस अपने साथ छाता या रेन कोट अवश्य रखें। ताकि आप अचानक होने वाली बारिश में भीगने से बच सकें। यदि संभव हो तो अपने बैग में एक जोड़ी एक्स्ट्रा कपड़े रखें। ताकि भीगने पर आप इन्हें बदल सकें।

-अपने घर में कूलर, छत या गमलों में पानी जमा ना होने दें। इस पानी में ही मच्छर खासतौर पर डेंगू के मच्छर पनपते हैं। जबकि मलेरिया के मच्छर नालियों में भरे गंदे पानी, तालाब और कीचड़ युक्त स्थान पर अधिक पनपते हैं। इसलिए जरूरी है कि आप अपने घर और आस-पास के क्षेत्र में सफाई का पूरा ध्यान रखें।

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