छत्तीसगढ़

मोदी सरकार ने मजदूरों के रेल किराये में 85 प्रतिशत सब्सिडी नहीं दी

रायपुर
श्रमिक स्पेशल ट्रेन में अव्यवस्था कुप्रबंधन मजदूरों से ज्यादा किराया लेने के आरोप लगाते हुये प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि सब्सिडी तो दूर की बात है, मोदी सरकार ने वास्तव में श्रमिक ट्रेनों के लिए अतिरिक्त शुल्क वसूला है। करोना आपदा के समय केन्द्र की मोदी सरकार का रवैया पूरी तरह से गलत आपत्तिजनक एवं जनविरोधी रहा है। मोदी सरकार के कुप्रबंधन और गलत फैसलों का खामियाजा पूरे देश ने और खासकर गरीब मजदूर किसान, मध्यम वर्ग, निजी नौकरी करने वालों, व्यापार जगत और उद्योग जगत ने भुगता है।  

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि केंद्र सरकार का दावा पूरी तरह से गलत है कि वह श्रमिक ट्रेनों के किराए में 85 प्रतिशत सब्सिडी दे रही है। राज्य सरकारों और मजूदरो से भी श्रमिक ट्रेनों के किराए के लिए प्रति श्रमिक अतिरिक्त शुल्क लिया गया है। भाजपा सरकार और संगठन द्वारा किया जा रहा रेल किराये में 85 प्रतिशत सब्सिडी का आंकड़ा बिल्कुल गलत और निराधार है। केन्द्र सरकार अब यह स्पष्ट करे कि किस आधार पर 85 प्रतिशत किराया कम लेने का दावा किया जा रहा है? छत्तीसगढ़ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दिए गए शपथ पत्र में कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने 40 श्रमिक ट्रेनों के लिए 38,331,330 रू. भारतीय रेल को दिए हैं। केन्द्र सरकार ने तो मजदूरों को न केवल पूरा किराया बल्कि सामान्य किराए से भी ज्यादा किराया देने के लिए मजबूर किया।

तिरुअनंतपुरम में, केरल से अंबिकापुर के लिए चलाई गई ट्रेन का कुल किराया 13 लाख रू., 12 सौ पैसेंजर हेतु लिए गए। अर्थात 1083 रू. प्रति पैसेंजर। जबकि मेल/एक्सप्रेस ट्रेन(स्लीपर) में 2675 किलोमीटर का किराया 813 रू. निर्धारित है।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि सरकार द्वारा निशुल्क भोजन पानी दिए जाने का दावा भी झूठ है। 50 से 100 रू. अतिरिक्त सामान्य किराए से अधिक वसूले गए है। इसके बावजूद भोजन पानी की समुचित व्यवस्था नहीं हो पाई। अनेक मजदूर ट्रेनों में सड़ा खाना बासी खने की शिकायतें मिली और भूखे मजदूरों को खाना फेकना पड़ा। जिन मजूदरों को ट्रेनों में खाना दिया गया वह भी अपर्याप्त था।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि अतिरिक्त किराए और भोजन की अव्यवस्थाओं के अलावा श्रमिक स्पेशल ट्रेनें और कई बार मार्ग से भटकी भी। वसई (मुंबई) से गोरखपुर के लिए चली ट्रेन, 700 किलोमीटर दूर पूर्वोत्तर में राउरकेला पहुंच गई थी। अहमदाबाद से चांपा के लिए चली ट्रेन 27 मई को छत्तीसगढ़ पहुंची, श्रमिकों की शिकायत थी की, 26 घंटे के सफर में उन्हें केवल एक बार भोजन दिया गया।

केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने गलत दावा किया है कि ट्रेनें भटकी नहीं थी बल्कि रेल लाइनों की व्यस्तता के कारण उन्हें डायवर्ट किया गया था। यह दावा इसलिये भी गलत है क्योंकि लॉकडाउन से पहले सामान्य दिनों में रेल लाइनें अधिक व्यस्त होती थी। सामान्य दिनों में भारतीय रेल 13,000 पैसेंजर ट्रेन चलाती है, जबकि पिछले महीने केवल 4000 श्रमिक ट्रेनें ही चलाई गयीं। आर्थिक गतिविधियों में कमी के कारण मालवाहक ट्रेनें भी पहले की तुलना में बहुत कम चलाई जा रही हैं। इसलिये रेल्वे लाईनों की व्यवस्तता की बात पूरी तरह से गलत है।

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