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यस बैंक के लिए वरदान बना आरबीआई का बैन, कमाया 151 करोड़ रुपये का मुनाफा

नई दिल्ली
आरबीआई का बैन निजी क्षेत्र के यस बैंक (Yes Bank) के लिए वरदान साबित हुआ है। चालू वित्त वर्ष की दिसंबर, 2020 में समाप्त तीसरी तिमाही में बैंक ने 150.71 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है। इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में डूबा कर्ज (NPA) बढ़ने की वजह से बैंक को 18,654 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड घाटा हुआ था। करीब 10 महीने पहले यह बैंक घाटे में था। बैंक का घाटा इतना बढ़ गया था कि आरबीआई को उस पर प्रतिबंध लगाना पड़ा था। बैंक के बोर्ड को भी भंग कर दिया गया था। लेकिन दिसंबर तिमाही में बैंक ने शानदार प्रदर्शन किया है। शेयर बाजारों को भेजी सूचना में बैंक ने कहा कि तिमाही के दौरान उसकी कुल आय बढ़कर 6,518.37 करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 6,268.50 करोड़ रुपये थी। तिमाही के दौरान बैंक का ग्रॉस एनपीए घटकर कुल ऋण का 15.36 प्रतिशत रह गया, जो एक साल पहले समान तिमाही में 18.87 प्रतिशत था।

इसी तरह बैंक का शुद्ध एनपीए भी घटकर 4.04 प्रतिशत रह गया, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 5.97 प्रतिशत था। इसके चलते बैंक का कर और आकस्मिक खर्च को छोड़कर अन्य प्रावधान घटकर 2,198.84 करोड़ रुपये रह गया, जो एक साल पहले समान तिमाही में 24,765.73 करोड़ रुपये था। बैंक के निदेशक मंडल ने इक्विटी या ऋण के जरिये 10,000 करोड़ रुपये टाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस बीच दिसंबर तिमाही के परिणाम में आय से जुड़ी चुनौतियों में वृद्धि के बाद यस बैंक का परिसंपत्ति गुणवत्ता का दवाब चरम पर पहुंच गया है। मार्च तिमाही में बैंक की ग्रॉस एनपीए के अनुपात में उछाल भी आ सकता है। बैंक के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि खराब संपत्तियों की पहचान को लेकर उच्चतम न्यायालय का फैसला आ जाने के बाद जीएनपीए अनुपात कुल परिसंपत्तियों के 20 प्रतिशत को छू सकता है।

बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) प्रशांत कुमार ने बताया, ‘हमने जो दवाब देखा है, वह एक शिखर है। परिसंपत्ति की गुणवत्ता में कई सुधार हैं, जैसे कि संग्रह में सुधार, चेक बाउंस की दर में कमी और वसूली की दरों में तेजी आदि।’ कई खाते 90 दिन की समयसीमा के समाप्त होने के समय भुगतान करते हैं, जबकि कुछ खाते मजबूत मूल सिद्धांतों वाली कंपनियों के हैं, जो महामारी के कारण कठिनाइयों का सामना कर रही हैं। उन्होंने कहा, ‘पुनर्गठित कर्जों से निपटने के लिए हमें दो साल का समय मिला है, जबकि शेष 10 हजार करोड़ रुपये का हम 12 से 18 महीनों में हल निकालने के लिए आश्वस्त हैं।’

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