क्रिकेटखेल

यादगार है लॉर्ड्स में जीत का ‘वो जश्न’, 48 साल के हो गए सौरव गांगुली 

नई दिल्ली 
भारतीय टीम के लिए टेस्ट पदार्पण सीधे 'क्रिकेट का मक्का' कहे जाने वाले लॉर्ड्स पर… आगाज इतना बेहतरीन कि पहले टेस्ट में शतक के बाद अगले टेस्ट में भी शतक जड़ दिया… और जब कप्तानी मिली तो देश को जीतने की आदत डाल दी, वो भी ऐसी 'दादागीरी' के साथ कि जिसे देख क्रिकेट की दुनिया दंग रह गई. जी हां! बात हो रही है 'प्रिंस ऑफ कोलकाता', 'बंगाल टाइगर', 'ऑफ साइड के भगवान' जैसे नामों से पहचाने जाने वाले सौरव गांगुली की. भारतीय प्रशंसकों के चहते 'दादा' आज (8 जुलाई) 48 साल के हो गए

बात उन दिनों की है, जब 13 जुलाई 2002 को इंग्लैंड के ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर भारत और इंग्लैंड के बीच नेटवेस्ट सीरीज का फाइनल खेला गया. खचाखच भरे स्टेडियम में जैसे ही जहीर खान और मोहम्मद कैफ ने जीत का रन पूरा किया, मैदान में मानो बिजली-सी दौड़ गई. एंड्रयू फ्लिंटॉफ तो हताश होकर पिच पर ही बैठ गए. उधर, लॉर्ड्स की बालकनी में इंडियन कैप्टन ने अपनी टी-शर्ट उतारी और ऐसे लहराई कि यह वाकया इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया.

ये जवाब था एंड्रयू फ्लिंटॉफ को. इस इंग्लिश ऑलराउंडर ने उसी साल फरवरी (3 फरवरी 2002) में मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में भारत पर जीत के बाद अपनी शर्ट निकालकर मैदान में दौड़ लगाई थी. और अब दादा की बारी थी. बदला चुकाने का लॉर्ड्स से बड़ी जगह और कुछ नहीं हो सकती थी. और उन्होंने बालकनी से शर्ट लहराकर वानखेड़े का बदला लिया था.

सौरव गांगुली की अगुवाई में टीम इंडिया ने इंग्लैंड को एक रोमांचक मुकाबले में उसी धरती पर हराकर फाइनल के खिताब पर कब्जा जमाया था. इंग्लैंड ने भारत के सामने जीत के लिए 326 रनों का विशाल लक्ष्य रखा था. भारत के पांच विकेट महज 146 रन पर ही गिर गए थे. लेकिन युवराज सिंह (69) और मोहम्मद कैफ (नाबाद 87) ने शानदार बल्लेबाज कर टीम इंडिया को तीन गेंदें शेष रहते दो विकेट से रोमांचक जीत दिलाने में बेहद हम रोल निभाया था.

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