राजनीतिक

युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के जरिए दिग्गज नेताओं ने बिछाई बिसात

भोपाल
युवा कांग्रेस चुनाव के बहाने प्रदेश कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने एक तीर से कई निशाने लगा दिए हैं। इन नेताओं ने प्रदेश में युवा कांग्रेस के जरिए ऐसी बिसात बिछाई कि इस चुनाव से पूर्व वन मंत्री उमंग सिंघार और पूर्व गृह मंत्री बाला बच्चन का पीसीसी चीफ और नेता प्रतिपक्ष बनने में अड़ंगा लग सकता। दरअसल यह माना जा रहा है कि कमलनाथ पीसीसी चीफ या नेता प्रतिपक्ष में से एक पद छोड़ सकते हैं।

कांग्रेस में यह चर्चा तेज हो गई है कि युवा कांग्रेस का अध्यक्ष आदिवासी चुना गया तो प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के पद पर किसी आदिवासी नेता को पार्टी नहीं बैठाएगी। प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष की दौड़ में पूर्व मंत्री उमंग सिंघार और बाला बच्चन का नाम भी शामिल माना जा रहा है। ऐसी स्थिति में अब इन दोनों की नियुक्ति इस पद पर होना कठिन होगा।

 सूत्रों की मानी जाए तो प्रदेश कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने कांतिलाल भूरिया के बेटे विक्रांत भूरिया यदि युवा कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए तो इन दो आदिवासी नेताओं को फिलहाल संगठन में महत्वपूर्ण पद नहीं मिल सकेगा। विक्रांत भूरिया आदिवासी वर्ग से आते हैं। युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष यदि आदिवासी वर्ग से बने तो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के पद पर आदिवासी नेता की नियुक्ति होना आसान नहीं होगा।  

इधर इस चुनाव में तीन विधायकों की भी प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। सतना विधायक सिद्धार्थ कुशवाह चुनाव मैदान में है। वहीं विपिन वानखेड़े ने मतदान के एक दिन पहले अचानक अपने को इस मुकाबले से बाहर होने का पत्र सार्वजनिक किया। जबकि तीसरे विधायक लाखन सिंह यादव है, पूर्व मंत्री लाखन सिंह यादव के भतीजे संजय यादव भी इस मुकाबले में खड़े हुए हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और उमंग सिंघार का विवाद हो चुका है। सिंघार जब वन मंत्री थे तब वे एक पत्र को लेकर वे दिग्विजय सिंह से भीड़ गए थे। बाद में तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ के हस्तक्षेप के बाद मामला सुलझ सका।

उमंग सिंघार को राहुल गांधी का करीबी माना जाता है। वे राहुल गांधी की टीम में राष्टÑीय सचिव थे और झारखंड का उनके पास प्रभार भी था। फिलहाल वे प्रदेश के किसी भी नेता के गुट में नहीं थे। हालांकि विधानसभा चुनाव के समय वे ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी हो गए थे, लेकिन उन्होंने सिंधिया के साथ पार्टी नहीं छोड़ी।

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