राजनीतिक

राज्यसभा चुनाव : क्रास वोटिंग के हालात रोकने के लिए BJP रखेगी विधायकों पर नजर

भोपाल
राज्यसभा चुनाव में किसी तरह की चूक नहीं होने देने और क्रास वोटिंग के हालात रोकने के लिए भाजपा अगले दो दिनों तक अपने विधायकों पर नजर रखेगी। हालांकि इस चुनाव में पार्टी के दोनों ही प्रत्याशियों ज्योतिरादित्य सिंधिया और सुमेर सिंह सोलंकी की जीत तय मानी जा रही है लेकिन पार्टी किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहती। इतना ही नहीं पार्टी ने वोटिंग के दौरान किसी तरह की गड़बड़ न हो, इसकी निगरानी के लिए भी आधा दर्जन विधायकों व पदाधिकारियों की जिम्मेदारी तय की है जिन्हें मतदान के दौरान सक्रियता के लिए आज टिप्स दिए गए।

19 जून को होने वाले मतदान के लिए भाजपा के अधिकांश विधायक आज भोपाल बुलाए गए हैं। इनमें से पचास फीसदी आज सुबह तक भोपाल आ चुके हैं जबकि बाकी शाम छह बजे के पहले आ जाएंगे। चूंकि विधायकों के टूटने से झटका खा चुकी कांग्रेस मौके की तलाश में है, इसे देखते हुए संगठन किसी तरह की लापरवाही नहीं होने देना चाहता। इसकी गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रदेश प्रभारी डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे, केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बीजी पांडा के 18 जून को भोपाल आने के कार्यक्रम में बदलाव कर उन्हें आज ही भोपाल भेजा गया है। ये तीनों ही नेता आज से लगातार पार्टी विधायकों और नेताओं के संपर्क में रहेंगे।

राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान के दौरान पार्टी ने विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया, अरविन्द सिंह भदौरिया, उमाशंकर गुप्ता, राजवर्धन सिंह दत्तीगांव, गिरीश गौतम समेत अन्य को इलेक्शन एजेंट मैनेजमेंट की व्यवस्था का जिम्मा सौंपा गया है। इसके लिए बीजेपी दफ्तर में इन नेताओं की आज बैठक हुई और उन्हें वोटिंग से लेकर मतगणना तक की कार्यवाही के लिए बताया गया। इसके पहले सिसोदिया ने गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा से उनके बंगले पर मुलाकात की और कहा कि जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसी परिप्रेक्ष्य में वे मंत्री मिश्रा से मिलने पहुंचे थे।

सहस्त्रबुद्धे और जावड़ेकर के भोपाल प्रवास के दौरान शिवराज मंत्रिमंडल विस्तार में मंत्री पद की दावेदारी करने वाले सीनियर एमएलए सक्रिय रहेंगे। चार से पांच बार के दर्जन भर ऐसे विधायक हैं जो मंत्री पद का दावा कर रहे हैं लेकिन सिंधिया समर्थक पूर्व विधायकों को मौका देने और संगठन के जिम्मेदार नेताओं की गुडलिस्ट में नहीं होने से वे मौका पाने की स्थिति में नहीं हैं। अगले तीन दिनों में इन नेताओं की मुलाकात भी सरगर्म होगी वहीं पूर्व मंत्रियों का जमावड़ा भी चर्चा में रहेगा।

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