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रेजांग ला में गलवान जैसे धोखे को दोहराना चाहता था चीन, धारदार हथियारों से लैस PLA की तस्वीरें बताती हैं नापाक इरादे

नई दिल्ली
पूर्वी लद्दाख में सोमवार को गलवान घाटी (India-China clash at Galwan valley) जैसे धोखे को दोहराने की चीन की कोशिशों को हमारे जांबाजों ने नाकाम किया था। रेजांग ला के उत्तर में स्थित मुखपुरी में धारदार हथियारों से लैस 40-50 की संख्या में चीन के सैनिकों ने (Chinses Army aggression at eastern Ladakh) भारतीय इलाके में चोटी पर कब्जा करने की कोशिश की थी जिस पर जवानों ने हवा में गोली दागकर उन्हें आगाह करने के बाद खदेड़ दिया। इस मुद्दे पर चीन ने झूठी कहानी गढ़ते हुए कहा था कि उसके सैनिक बातचीत के लिए गए थे और भारत की तरफ से उकसावे की कार्रवाई हुई है। अब ऐसी तस्वीरें आई हैं जो न सिर्फ चीन के झूठ का पर्दाफाश करती हैं, बल्कि उसके खतरनाक मंसूबों के बारे में भी बताती हैं।

चीन के झूठ और नापाक इरादों की पोल खोल रहीं तस्वीरें
तस्वीरों में दिख रहा है कि 40-50 की तादाद में चीन के सैनिक हथियारों से लैस होकर रेजांग ला के पास उन चोटियों पर आने की कोशिश कर हे हैं जिन पर भारतीय सैनिक तैनात हैं। तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि चीनी सैनिकों के पास धारदार हथियार हैं। वे भारतीय सैनिकों से महज 200 मीटर की दूरी पर हैं। जून के महीने में गलवान घाटी में जिस तरह उन्होंने धोखे से भारतीय जवानों पर धारदार हथियारों और कील लगे डंडों से हमला किया था, वैसे ही धोखे को दोहराने के लिए वे पूरी तैयारी के साथ आए थे। चीनी सैनिक रणनीतिक तौर पर अहम भारतीय चोटियों पर कब्जे की फिराक में थे। इतना ही नहीं, उन्होंने 10-15 राउंड फायरिंग भी की थी लेकिन भारतीय जवानों ने उन्हें खदेड़ दिया। 45 साल बाद एलएसी पर गोली चली थी। तस्वीरों में चीनी सैनिकों के पास जो हथियार दिख रहे हैं, उन्हें गुआंडाओ कहा जाता है। उनका इस्तेमाल चीनी मार्शल आर्ट में किया जाता है। इसमें एक 5-6 फीट लंबे पोल के ऊपर ब्लेड लगी होती है। यह ब्लेड एक तरफ पीछे की तरफ भी मुड़ी होती है। यह कुछ-कुछ भारतीय हथियार बर्छी से मिलता जुलता है। इसे बर्छी और भाले का संयुक्त रूप कहा जा सकता है।

सोमवार शाम को क्या हुआ, उसकी पूरी कहानी
एक दिन पहले सोमवार को मुखपारी में हुए वाकये की कहानी अब सामने आई है। शाम 6 बजे के करीब चीनी सैनिक आक्रामक ढंग से मुखपारी चोटी के नजदीक भारतीय चौकी की तरफ बढ़े थे। करीब 50 की संख्या में चीनी सैनिकों ने लद्दाख के रेकिन ला इलाके में रणनीतिक तौर पर अहम मुखपारी चोटी से भारतीय सैनिकों को हटाने की कोशिश की थी। सूत्रों ने बताया कि चीनी सैनिक रॉड, भाले और धारदार हथियारों से लैस होकर भारतीय चौकी की तरफ बढ़ रहे थे। आज सामने आई उस वक्त की तस्वीरों में भी दिख रहा है कि उनके हाथ में धारदार हथियार हैं। भारतीय चौकी की तरफ बढ़ रहे चीनी सैनिकों को जब इंडियन आर्मी ने रोका तब उन्होंने हमारे सैनिकों को डराने के लिए 10-15 राउंड फायरिंग भी की।

रेजांग ला में आमने-सामने हैं चीन के सैनिक, चरम पर तनाव
पैंगोंग झील के दक्षिण किनारे पिछले तीन दिनों से चीनी सैनिक इस तरह टुकड़ी में भारत की फॉरवर्ड पोजिशन के नजदीक आने की कोशिश कर रहे हैं। अभी भी रेजांग ला के पास की चोटियों के करीब भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने हैं। मौके पर तनाव चरम पर है। भारतीय सैनिक पीएलए की किसी भी हिमाकत का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

आधी रात चीन ने लगाया था आरोप
इससे पहले सोमवार देर रात चीन ने आरोप लगाया कि पैंगोंग झील के दक्षिण किनारे एलएसी पर भारतीय सेना ने फायरिंग की। चीन के वेस्टर्न थिएटर कमांड के कमांडर की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि यह घटना 7 सितंबर यानी सोमवार को हुई। चीन के मुताबिक भारतीय सेना ने बातचीत की कोशिश कर रहे चीन बॉर्डर गार्ड के लोगों पर वॉर्निंग शॉट फायर किए और फिर चीन बॉर्डर गार्ड के जवानों ने हालात काबू करने के लिए जरूरी कदम उठाए। चीन ने आरोप लगाया कि भारतीय सेना ने शेनपाओ की पहाड़ी पर एलएसी क्रॉस की और आरोप लगाया कि भारत ने द्विपक्षीय समझौतों का उल्लंघन किया है। इससे क्षेत्र में तनाव और गलतफहमी बढ़ेगी। चीनी सेना के वेस्टर्न थिएटर कमांड के कमांडर की तरफ से कहा गया कि हम भारतीय पक्ष से मांग करते हैं कि वह खतरनाक कदमों को रोके और फायरिंग करने वाले शख्स को सजा दे और सुनिश्चित करें कि ऐसी घटना फिर से ना हो।

गलवान हिंसा के बाद लोकल कमांडर्स को खुली छूट
भारत और चीन के बीच 1996 में हुए समझौते के मुताबिक न तो चीन और न ही भारत लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के 2 किलोमीटर के दायरे में न फायरिंग कर सकता है न ही कोई ब्लास्ट कर सकता है। एलएसी पर शांति बनी रहे इसके लिए 1993, 1996 और 2013 में समझौते हुए। प्रोटोकॉल तय किए गए कि हालात खराब होने पर किस तरह बातचीत के जरिए इसे सुलझाया जाएगा। लेकिन 15 जून को गलवान में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद भारत की तरफ से साफ कर दिया गया था कि लोकल कमांडर को पूरी छूट दी गई है और वह स्थिति के हिसाब से क्या करना है इसका फैसला ले सकते हैं। गलवान में भारत के 20 सैनिक शहीद हुए जिसके बाद यह सवाल उठने लगा था कि सैनिकों को फायरिंग की इजाजत क्यों नहीं दी गई। जिसके बाद देश की टॉप लीडरशिप की तरफ से और आर्मी की तरफ से भी साफ किया गया कि चीन से निपटने के लिए लोकल कमांडर हालात के हिसाब से फैसला ले सकते हैं।

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