राजनीतिक

लोकतंत्र परीक्षा की घड़ी में पूरी ताकत से लड़ता है: मिलिंद देवड़ा

 नई दिल्ली 
आपातकाल हमें याद दिलाता है कि जब भी लोकतंत्र की परीक्षा की घड़ी आती है, वो पूरी ताकत से लड़ता है। कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद मिलिंद देवड़ा ने गुरुवार (25 जून) को आपातकाल पर यह बात कही। उनके इस बयान को लेकर कांग्रेस 'असहज' हो सकती है।

देश में 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 के बीच आपातकाल लागू रहा। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लगाया था। आपातकाल के दौरान नागरिक अधिकारों में कटौती कर दी गई थी। विपक्ष के नेताओं और यहां तक कि इंदिरा गांधी के शासन की शैली का विरोध करने वाले कांग्रेस के कुछ नेताओं को भी जेल भेज दिया गया था।

आपातकाल के 45 साल पूरे होने पर उन्होंने ट्वीट किया,  "आपातकाल हमें याद दिलाता है कि जब भी लोकतंत्र की परीक्षा की घड़ी आती है, वो पूरी ताकत से लड़ता है। यह बात राजनीतिक दलों पर भी लागू होती है। लोकतांत्रिक संगठन बेहतर तरीके से खुद को ढालते हैं और चुनौतियों से पार पाते हैं। लोकतंत्र लगातार आगे बढ़ता रहता है और इसमें  प्रतिबद्धता, बलिदान और ईमानदार आत्मनिरीक्षण की जरूरत होती है।"

यह पहली बार नहीं है जब देवड़ा ने कांग्रेस की लाइन से अलग होकर अपनी राय रखी है। यह इस बात की ओर भी संकेत करती है कि वो शायद पार्टी से किनारा कर सकते हैं। इसी साल अप्रैल में मिलिंद देवड़ा ने पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और वायनाड से सांसद राहुल गांधी के उस बयान का विरोध किया था जिसमें उन्होंने क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) की घटी हुई कीमत को लेकर देश में तेल की कीमत घटाने की मांग की थी।

जहां राहुल और कांग्रेस के दूसरे नेताओं ने सरकार से यह मांग की थी कि वो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के मूल्य में आई गिरावट का लाभ उपभोक्ताओं को देते हुए देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम करे, वहीं देवड़ा ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा था कि गाड़िया चल नहीं रही हैं, इसलिए तेल के दामों में कटौती का उपभोक्ताओं को कोई फायदा नहीं होगा।

भाजपा नेताओं ने आपातकाल को लेकर कांग्रेस पर साधा निशाना
वहीं, भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने आपातकाल के 45 साल पूरा होने पर बृहस्पतिवार (25 जून) को कांग्रेस पर तीखा हमला किया। सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस में आज भी "आपातकाल की मानसिकता" विद्यमान है और ''एक परिवार" के हित दलीय और राष्ट्रीय हितों पर हावी हो गए। वर्ष 1975 में आपातकाल लगाने के लिए अक्सर कांग्रेस की आलोचना करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ट्वीट में पार्टी का नाम तो नहीं लिया, लेकिन इसके खिलाफ लड़ने वालों की सराहना की। गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के कई अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी कांग्रेस पर वार किया।

लोकतंत्र के लिए लड़ने वाले लोगों को देश कभी नहीं भूल पाएगा: मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार (25 जून) को कहा कि आपातकाल के दौरान लोकतंत्र के लिए लड़ने वाले लागों को देश कभी नहीं भूल पाएगा। मोदी ने ट्वीट किया, ''आज से ठीक 45 वर्ष पहले देश पर आपातकाल थोपा गया था। उस समय भारत के लोकतंत्र की रक्षा के लिए जिन लोगों ने संघर्ष किया, यातनाएं झेलीं, उन सबको मेरा शत-शत नमन।" उन्होंने कहा कि उनका त्याग और बलिदान देश कभी नहीं भूल पाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि लोगों ने बाकी अन्य अधिकारों और जरूरतों की परवाह करते हुए 1977 के लोकसभा चुनाव में केवल लोकतंत्र के लिए मतदान किया था। मोदी ने कहा, ''देश ने ऐसा चुनाव 1977 में देखा था, जब लोगों ने सिर्फ लोकतंत्र के लिए बाकी के अधिकारों, हकों की परवाह करते हुए मतदान किया था।"

 आपातकाल को लेकर अमित शाह ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि एक परिवार के हित दलीय व राष्ट्रीय हितों पर हावी हो गए हैं। उन्होंने सवाल किया कि ''आपातकाल की मानसिकता क्यों आज भी कांग्रेस में विद्यमान है।" शाह ने सिलसिलेवार ट्वीट में कहा, ''45 साल पहले आज ही के दिन एक परिवार की सत्ता की लालसा ने देश पर आपातकाल थोपा। रातों-रात देश को कैदखाने में तब्दील कर दिया गया। प्रेस, अदालतें और यहां तक कि बोलने की आजादी भी कुचल दी गई। गरीबों और दबे-कुचलों पर अत्याचार किए गए।"

शाह ने कहा कि लाखों लोगों के प्रयासों की बदौलत आपातकाल हटा और लोकतंत्र बहाल हुआ, लेकिन यह लोकतंत्र आज भी कांग्रेस पार्टी से नदारद है। उन्होंने कहा, ''एक परिवार का हित दलीय और राष्ट्रीय हितों पर हावी हो गया। आज की कांग्रेस का भी यही हाल है।" पिछले दिनों हुई कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक का जिक्र करते हुए शाह ने दावा किया कि उसमें पार्टी के कुछ वरिष्ठ और युवा नेता कुछ मुद्दे उठाना चाहते थे, लेकिन उन्हें चुप करा दिया गया। उन्होंने कहा, ''हाल ही में कांग्रेस के एक प्रवक्ता को पद से हटा दिया गया। सच्चाई ये है कि पार्टी के नेता अब कांग्रेस में घुटन महसूस कर रहे हैं।"

लोकतंत्र की हत्या करनेवाले, आज सरकार पर सवाल उठा रहे हैं
सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने आपातकाल थोपे जाने को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और कहा कि जिन्होंने 45 वर्ष पूर्व लोकतंत्र की हत्या की, वे आज सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। जावड़ेकर ने कहा, ''मुझे आश्चर्य होता है कि जिन्होंने 45 साल पूर्व लोकतंत्र की हत्या की, आज वे सरकार पर सवाल उठा रहे हैं।" उन्होंने कहा, ''जिस पार्टी ने पूरे तंत्र को कुचल कर रख दिया, लोगों की आजादी छीन ली और हजारों लोगों, खासकर विपक्षी लोगों, को जेल भेज दिया, आज वे आजादी के नारे बुलंद कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि इस प्रकार की राजनीति को देश कभी स्वीकार नहीं करेगा।"

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