भोपालमध्यप्रदेश

विधानसभा पहुंचा स्कूलों की दादागिरी का कच्चा चिट्ठा, मंत्री के जवाब से चला था पता

भोपाल
कोरोना काल में बच्चों की स्कूल फीस के लिए निजी स्कूल के संचालकों ने पालकों पर जमकर दबाव बनाया। इस संबंध में प्रदेश में सबसे ज्यादा शिकायतें इंदौर और सतना जिले में आई। भोपाल के भी चार स्कूलों के खिलाफ इस संबंध में शिकायत हुई। वहीं सरकार ने भी कोरोना काल के दौरान बच्चियों को साइकिल नहीं दी । जबकि जनवरी से 9वीं की छात्राएं स्कूल जा रही है।

कोरोना काल के दौरान सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों को कहा था कि निजी स्कूल बच्चों की फीस के लिए जबरन दबाव न बनाए। सभी निजी स्कूलों पर नजर रखी जाए। इसके बाद भी प्रदेश के 159 स्कूलों पर कलेक्टर नजर नहीं रख सके और स्कूल प्रबंधन ने कई पालकों से उनके बच्चों की स्कूल फीस के लिए दबाव बनाया। प्रदेश में फरवरी तक 159 ऐसी शिकायतें आई है। जिसमें निजी स्कूलों  के प्रबंधकों ने फीस वसूली के लिए दबाव बनाया।

इस मामले में सबसे ज्यादा शिकायतें इंदौर और सतना जिले में मिली है। इंदौर और सतना में 35-35 शिकायतें निजी स्कूलों द्वारा फीस के लिए दबाव बनाने की सामने आई हैं। वहीं छिंदवाड़ा में 32 शिकायतें सामने आई है।

कांग्रेस के विधायक जीतू पटवारी के एक सवाल के जवाब में विधानसभा में आए लिखित उत्तर में बताया गया कि उज्जैन में चार, बड़वानी में एक, खंडवा में 14, बुरहानपुर में एक, भोपाल में 4, राजगढ़ में एक, सागर में आठ, रीवा में सात, सीधी में पांच शिकायतें फीस वसूली के लिए निजी स्कूलों के संबंध में आई।

वहीं कोरोना काल में सरकार भी 6 वीं और 9 वीं कक्षा की छात्राओं को साइकिल नहीं दे सकी। सरकार की योजना है कि 6 वीं और 9वीं कक्षा की जिन छात्राओं के स्कूल 3 किलो मीटर से दूर हैं, उन्हें साइकिल दी जाए। हालांकि वर्ष 2017-18 में प्रदेश में साढ़े चार लाख छात्राओं को साइकिल दी गई थी। वहीं वर्ष 2018-19 में सवा चार लाख छात्राओं को साइकिल मिली। वहीं वर्ष 2019-20 में 3 लाख 80 हजार के लगभग छात्राओं को सरकार ने साइकिल दी थी। गौरतलब है कि जनवरी से 9वीं से लेकर 12 वीं तक के विद्यार्थियों की पढ़ाई स्कूल में शुरू हो चुकी है।

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