दिल्ली/नोएडाराज्य

सरकार ने बताई बेड संख्या, किस प्राइवेट अस्पताल में कोरोना का सस्ता इलाज

नई दिल्ली 
केंद्रीय गृह मंत्रालय की बनाई डॉ वीके पॉल कमिटी ने दिल्ली के प्राइवेट अस्पतालों में उनकी कुल क्षमता के 60 फीसदी बेड पर कोरोना मरीजों के सस्ते इलाज की सिफारिश की थी. इसपर दिल्ली सरकार ने पहले आदेश जारी किया और अब यह साफ किया है कि किस अस्पताल में कितने बेड इन रियायती रेटों पर उपलब्ध हैं.डायरेक्टरेट जनरल हेल्थ सर्विसेज, दिल्ली के सर्कुलर के मुताबिक, दिल्ली में केवल 7 ऐसे अस्पताल हैं जो अपनी कुल क्षमता के 60% बेड से भी ज्यादा पर पहले से ही कोरोना का ट्रीटमेंट कर रहे हैं. इसलिए इनमें रियायती रेट वाले बेड की संख्या दिल्ली सरकार ने बताई है.

1. मैक्स साकेत- 120 बेड्स

2. सर गंगाराम कोलमेट हॉस्पिटल- 25 बेड्स

3. महादुर्गा चैरिटेबल ट्रस्ट हॉस्पिटल- 60 बेड्स

4. सर गंगा राम सिटी हॉस्पिटल-72 बेड्स

5. सिग्नस ऑर्थोकेयर अस्पताल- 24 बेड्स

6. सरोज सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल- 102 बेड्स

7. बंसल ग्लोबल हॉस्पिटल- 30 बेड्स

दिल्ली के 108 प्राइवेट अस्पताल ऐसे हैं, जो अपनी कुल क्षमता के 19% से 58% बेड्स पर ही कोरोना के मरीजों का ट्रीटमेंट कर रहे हैं. यानी इन सभी 108 अस्पतालों में मरीजों को यह सोचने की जरूरत नहीं है कि यहां सस्ता इलाज होगा या नहीं , क्योंकि यहां पर सभी 100% बेड रियायती रेट पर उपलब्ध होंगे. इन 108 अस्पतालों में छोटे, बड़े और मीडियम सभी तरह के अस्पताल हैं.
 
जिन 7 अस्पतालों में रियायती रेट वाले बेड की संख्या बताई गई है, यानी जो पहले ही अपनी कुल क्षमता के 60% से ज़्यादा बेड्स पर कोरोना मरीजों का ट्रीटमेंट कर रहे हैं वह अस्पताल मरीज को बाकी बचे 40% बेड्स अपने तय किए हुए रेट्स पर दे सकते हैं, लेकिन एडमिट करते वक्त मरीज से लिखित सहमति लेनी होगी और इसका बाकायदा रिकॉर्ड रखना होगा.
 
जिन अस्पतालों को रियायती दरों पर जमीन दी गई है और वह कोरोना के मरीजों का इलाज कर रहे हैं, उनको कुल कोरोना बेड्स के 10% बेड्स आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को मुफ्त में इलाज के लिए देने होंगे. वहीं, वह सभी 108 अस्पताल जिनमें इस समय उनकी कुल क्षमता के 60 फीसदी से कम बेड पर कोरोना का इलाज हो रहा है और इसलिए उनको फिलहाल अपने सभी मौजूदा कोरोना बेड पर सस्ते में इलाज देना होगा.
 
वो अस्पताल अगर अपनी कुल क्षमता के 60 फीसदी से ज्यादा बेड कोरोना के इलाज के लिए रखते हैं तो उनको बाकी 40% बेड्स पर मरीजों से ज्यादा पैसा लेने से पहले लिखित में सुपरवाइजिंग अथॉरिटी को जानकारी देनी होगी.

 

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