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सिंधिया बोले मैंने कभी भी राजनीति में छल कपट का सहारा नहीं लिया,BJP अब मेरा परिवार

भोपाल

मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान सरकार में कैबिनेट विस्तार के बाद विभाग के बंटवारों को लेकर जारी खींचतान के बीच ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है कि हमने कभी राजनीति में छल कपट का सहारा नहीं लिया. हमने पूरी तरह से बीजेपी को सौंप दिया और यही पार्टी मेरा परिवार है.

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीट किया, 'चाहे मेरे पूज्य पिताजी हो या मैं, हमने कभी भी राजनीति में छल कपट का सहारा नहीं लिया. इसीलिए लोग हम पर अनर्गल आरोप लगाते हैं. मैंने खुद को पूरे विश्वास के साथ भारतीय जनता पार्टी को सौंप दिया है. अब यही मेरा परिवार है.'

विभाग बंटवारे पर अब तक फैसला नहीं

कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने यह बात ऐसे समय कही है जब मंत्रिमंडल विस्तार के बाद विभागों के बंटवारे को लेकर अभी तक सीएम शिवराज सिंह चौहान कोई फैसला नहीं कर पाए हैं. मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के जोड़-तोड़ से शिवराज सिंह चौहान की अगुआई में बीजेपी की सरकार तो बन गई. तमाम कवायदों के बाद किसी तरह शिवराज मंत्रिमंडल का विस्तार भी हो गया है, लेकिन चार दिन के बाद भी मंत्रियों के विभागों का बंटवारा नहीं हो सका है. माना जा रहा है कि विभागों के बंटवारे में सिंधिया अपने समर्थक मंत्रियों को मलाईदार विभाग देने की डिमांड कर रहे हैं.

शिवराज सिंह चौहान ने विभागों को लेकर अंतिम निर्णय लेने से पहले रविवार को दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और महामंत्री बीएल संतोष से मुलाकात की. इसके पहले शिवराज सिंह चौहान ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ भी बैठक की थी.

असल में, कमलनाथ सरकार में सिंधिया खेमे के पास स्वास्थ्य, राजस्व, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा, परिवहन, श्रम और खाद्य विभाग थे. बताया जा रहा है कि सिंधिया ये विभाग अपने समर्थकों को दिलाने की जुगत में हैं. इन विभागों के अलावा कुछ अन्य अहम विभागों पर भी सिंधिया और उनके सहयोगी मंत्रियों की निगाहें हैं.

पहले विस्तार में उनके करीबी तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत को कमलनाथ सरकार की अपेक्षा कम महत्वपूर्ण विभाग मिले तो राजनीतिक गलियारों में इसे सिंधिया के प्रभाव से जोड़कर देखा जाने लगा. चर्चा यहां तक होने लगी थी कि अब वह बीजेपी के दबाव में हैं, लेकिन मंत्रिमंडल के दूसरे विस्तार में अपने दर्जन भर समर्थकों को शामिल कराकर उन्होंने अपनी सियासी ताकत दिखा दी. शिवराज कैबिनेट में 14 सिंधिया समर्थक मंत्री हैं, जिनमें 9 कैबिनेट और 5 राज्यमंत्री बनाए गए हैं.

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