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सीमावर्ती सड़कों के लिए सरकार बजट चार गुना बढ़ाया

नई दिल्ली
चीन के साथ पूर्वी लद्दाख सीमा पर चल रही तनातनी (standoff with China) के बीच भारत ने सीमावर्ती इलाकों (border areas) में राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव और मरम्मत के लिए आवंटन चार गुना बढ़ा दिया है। इन सड़कों की मरम्मत और रखरखाव का जिम्मा सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के पास है। इसके लिए आवंटन 30 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 120 करोड़ रुपये कर दिया गया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने साथ ही सीमावर्ती इलाकों में नए राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने के लिए आवंटन की सीमा में भी कई गुना इजाफा किया है। लद्दाख में 589 करोड़ रुपये तक के काम को मंजूरी दी जा सकती है। पहले यह सीमा महज 72 करोड़ रुपये थी।

चीन के साथ लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर लंबे समय से जारी गतिरोध के मद्देनजर सरकार का यह फैसला काफी अहम है। सीमावर्ती इलाकों में सड़कों के विकास से सेना और साजोसामान को आसानी से सीमा तक पहुंचाया जा सकेगा। सरकार ने यह फैसला ऐसे समय लिया है जब नवगठित केंदशासित प्रदेश लद्दाख में विकास के काम तेजी से किए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि सीमावर्ती इलाकों में सड़कों के निर्माण से चीन चिढ़ा हुआ है और यही वजह है कि वह लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर आक्रामक रुख दिखा रहा है। चीन ने एलएसी पर अपनी तरफ सड़कों का जाल बिछाया है। लेकिन भारत जब ऐसा कर रहा है तो चीन इसे पचा नहीं पा रहा है।

सीमावर्ती सड़कों का काम तेज
बीआरओ रक्षा मंत्रालय के अधीन है लेकिन राजमार्ग मंत्रालय उन राजमार्गों की मरम्मत और रखरखाव के लिए उसे बजट आवंटित करता है जिनका काम उसके जिम्मे होता है। हाल के वर्षों में सीमावर्ती इलाकों में सड़कों की क्वालिटी में सुधार के काम में तेजी आई है। सीमावर्ती इलाकों और पहाड़ी राज्यों में राष्ट्रीय राजमार्ग के विकास का काम एनएचआईडीसीएल के पास है। कोविड-19 संक्रमण के कारण सीमावर्ती इलाकों में सड़क निर्माण का काम प्रभावित हुआ था। लेकिन एनएचआईडीसीएल ने अब फिर से रफ्तार पकड़ ली है। एजेंसी दोगुना मजदूरी दे रही है और ऊंचाई वाले इलाकों में तो मेहनताना 170 फीसदी तक बढ़ा दिया गया है। इनमें से कई सड़कें चीन से लगते सीमावर्ती इलाकों में बनाई जा रही हैं।

एलएसी पर चीन की आक्रामकता को देखते हुए सरकार ने कई स्थानों पर सड़कों के निर्माण का काम तेज कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक राजमार्ग मंत्रालय ने सड़कों के रखरखाव और मरम्मत के लिए जो फंड जारी किया है, उसका बड़ा हिस्सा सीमावर्ती इलाकों में सामरिक महत्व की सड़कों को दुरुस्त करने पर खर्च किया जाएगा। तीन महीने से भी कम समय में यह आवंटन संशोधित किया गया है। मौजूदा वित्त वर्ष के लिए पहला आवंटन अप्रैल के पहले हफ्ते में किया गया था।

इससे पहले मंत्रालय ने 27 जून को जारी सर्कुलर में जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में भी आवंटन की सीमा बढ़ाकर 4031 करोड़ रुपये कर दी थी। जम्मू-कश्मीर में 1351 करोड़ रुपये की नई परियोजनाएं शुरू की जा सकती है जबकि उत्तराखंड के लिए यह सीमा 340 करोड़ कर दी गई है।

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