बिज़नेस

सोने की कीमतों में गिरावट 

 
नई दिल्ली

वैश्विक कीमतों में गिरावट की रिपोर्ट्स के बीच दिल्ली हाजिर सर्राफा बाजार में सोमवार को सोने का भाव (gold price today) 380 रुपये टूटकर 47,900 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने यह जानकारी दी। इससे पिछले कारोबारी सत्र में सोना 48,280 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। चांदी की कीमत  भी 590 रुपये की गिरावट के साथ 48,200 रुपये प्रति किग्रा पर बंद हुई। इससे पहले के कारोबारी सत्र में यह 48,790 रुपये प्रति किलो के भाव पर बंद हुई थी।

ग्लोबल मार्केट में क्या हैं हाल?
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक (जिंस) तपन पटेल ने कहा, 'अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने का भाव 1,721 डॉलर प्रति औंस और चांदी 17.26 डॉलर प्रति औंस थी।' उन्होंने कहा, 'शेयर बाजार के अनुरूप सोमवार को सोने की कीमतों में गिरावट आई जहां दुनिया भर में इस वायरस के दोबारा फैलने को लेकर आशंका दिखाई दी।'
 
बाजार में जब महंगाई बढ़ती है तब सोने की मांग काफी बढ़ जाती है और महंगाई के कम होने पर सोने की मांग कम भी होती है। ऐसे में महंगाई का बढ़ना-घटना भी सोने की कीमतों पर असर डालता है।
सरकार का गोल्ड रिजर्व
देशों के सेंट्रल बैंक गोल्ड रिजर्व रखते हैं। जब-जब सेंट्रल बैंक ऐसा करते हैं तब सोने के दाम बढ़ जाते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इस परिस्थिति में बाजार में करंसी का फ्लो बढ़ जाता है और सोने की सप्लाई कम हो जाती है।
वैश्विक बाजार में कैसी चाल?
ग्लोबल मूवमेंट में किसी भी तरह के परिवर्तन का असर भारत में सोने की कीमत पर भी पड़ता है। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत सोने के सबसे बड़े आयातक देशों में से है। ऐसे में जब किसी ग्लोबल मूवमेंट की वजह से एक्सपोर्ट करने वाला देश सोने पर आयात शुल्क बढ़ा देते हैं तब भी इसका असर भारत में दिखता है और सोना महंगा हो जाता है।
ब्याज दर का असर
फाइनैंशल प्रॉडक्ट्स और सर्विसेस के लिए ब्याज दरों का सीधा संबंध सोने की मांग से होता है। करंट गोल्ड प्राइस किसी भी देश में इंट्रेस्ट रेट्स के लिए भरोसेमंद संकेतों की तरह माने जाते हैं। ब्याज दरों में कमी की वजह से ग्राहक कैश के बदले सोना बेचने लगते हैं और इससे गोल्ड की सप्लाई बढ़ जाती है और फिर इसके दाम कम हो जाते हैं। इसी तरह जब इंट्रेस्ट रेट्स कम होते हैं तब सोने की मांग बढ़ती है और इसकी कीमत में भी बढ़ोतरी हो जाती है।
जूलरी मार्केट
भारत में त्योहारों के वक्त जूलरी की खरीद एक धार्मिक काम की तरह होता है। ऐसे में दीवाली और धनतेरस जैसे त्योहारों के दौरान देश में सोने की मांग काफी बढ़ जाती है। ऐसे में कीमत बढ़ना भी तय है।
कई और भी हैं कारण
ऊपर जिन बातों का जिक्र किया गया है उनके अलावा भी कई ऐसे कारक हैं जो सोने की कीमत को प्रभावित करते हैं। जैसे, सोने के प्रोडक्शन में लगने वाला खर्च भी इसकी कीमत निर्धारित करता है। इन सबके अलावा जो बात गौर करने लायक है वह ये है कि मांग और आपूर्ति सोने की कीमत तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं।

वायदा बाजार में भी गिरा सोना
विदेशों में कमजोरी के रुख के बाद कारोबारियों ने अपने सौदों की कटान की जिससे वायदा कारोबार में सोमवार को सोने की कीमत 0.68 प्रतिशत की गिरावट के साथ 47,011 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गयी। एमसीएक्स में अगस्त महीने में डिलिवरी वाले सोने की वायदा कीमत 323 रुपये यानी 0.68 प्रतिशत टूटकर 47,011 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गयी जिसमें 14,120 लॉट का कारोबार हुआ।
 

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