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हिरासत में पिता-पुत्र की मौत मामले की CB-CID ने शुरू की जांच

तूतीकोरिन

तमिलनाडु के तूतीकोरिन में पुलिस की बर्बरता के कारण एक पिता और उसके बेटे की मौत की जांच सीबी-सीआईडी ने आज बुधवार से शुरू कर दी है. सीबी-सीआईडी को तूतीकोरिन में पुलिस हिरासत में पिता-पुत्र की हुई मौत की जांच करने को कहा गया है.

मद्रास हाई कोर्ट ने मंगलवार को जांच एजेंसी को निर्देश दिया था कि जांच एजेंसी के तिरुवनेवली के डीएसपी अनिल कुमार मामले की जांच करें. अनिल कुमार की अगुवाई में सीबी-सीआईडी की टीम ने मृतकों के परिजनों से पूछताछ के अलावा उन लोगों से भी पूछताछ की जहां पर उनकी मोबाइल की दुकान थी. साथ ही इस टीम ने उस पुलिस थाने का भी दौरा किया जहां पर यह घटना हुई थी.

इससे पहले जांच कर रहे मजिस्ट्रेट ने मंगलवार को मद्रास हाई कोर्ट के सामने अपनी रिपोर्ट रख दी और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए. मजिस्ट्रेट की पूछताछ में पता चला कि पी जयराज और उनके बेटे बेनिक्स को सनाथकुलम थाने में सुबह तक पीटा गया था.

सरकार ने सौंपी जांच

पिछले महीने लॉकडाउन के दौरान पुलिस हिरासत में पिता और बेटे की मौत की घटना पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई थी. विवाद बढ़ता देख राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का ऐलान किया.

मद्रास हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के फैसले पर अपनी सहमति देते हुए सीबीआई को केस ट्रांसफर करने की अनुमति दे दी.

तूतीकोरिन में पुलिस की बर्बरता के कारण एक पिता और उसके बेटे की मौत इन दिनों लगातार चर्चा में है. इस मामले में डॉक्टर की रिपोर्ट में दर्ज टिप्पणियां इस बात की ओर संकेत करती हैं कि दोनों को काफी शारीरिक यातनाएं दी गईं थी.

तूतीकोरिन में हिरासत में जयराज (59) और उनके बेटे बेनीक्स (31) की मौत मामले में पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है. जयराज की पत्नी ने आरोप लगाया कि उनके पति और बेटे को अपमानित किया गया और उन्हें यातनाएं दी गईं, जिससे उनकी मौत हो गई.

लॉकडाउन में दुकान खोलने की सजा

कोविलपट्टी उप-जेल अस्पताल से प्राप्त रिकॉर्ड से पता चलता है कि जयराज और उनके बेटे बेनीक्स के ग्लूटियल भाग पर कई निशान थे. बेनीक्स के मामले में अस्पताल के रिकॉर्ड से पता चला कि उसके घुटने के कप दबाए गए थे. इसी रिकॉर्ड के मुताबिक जयराज शुगर से पीड़ित थे. रिपोर्ट में दर्ज ये टिप्पणियां यातनाएं दिए जाने का संकेत देती हैं.

पिता-पुत्र दोनों को 19 जून को लॉकडाउन के दौरान अपनी मोबाइल एसेसरीज की दुकान को खुला रखने के कारण सथानकुलम पुलिस इन्हें पूछताछ के लिए थाने ले गई थी.

हिरासत में रहने के दौरान पुलिस ने उनके साथ क्रूरता की, जिससे उनकी मौत हो गई थी. बेटा बीमार हो गया और 22 जून को कोविलपट्टी जनरल अस्पताल में उसकी मौत हो गई. उसके पिता की मृत्यु 23 जून की सुबह हुई थी.

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