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 2 सालों में 68 हजार रुपये तक बढ़ सकती हैं कीमतें, अभी सोना खरीदना फायदे का सौदा

 नई दिल्ली
कोरोना वायरस की वजह से शेयर बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में लोग एक सुरक्षित निवेश की ओर जा रहे हैं और उन्हें सोना सबसे बेहतर विकल्प दिख रहा है। यही वजह है कि कोरोना महामारी के दौर में भी सोने की चमक बरकरार है। वैसे तो सोने के दाम में भी थोड़ा उतार-चढ़ाव दिख रहा है, लेकिन उसकी वजह मुनाफावसूली है। आज के दौर में सोना खरीदना (Gold buying) बेहद फायदे का सौदा हो सकता है, क्योंकि एक अनुमान के मुताबिक अगले तो सालों में इसकी कीमत 68 हजार रुपये (Gold price may touch 68000) तक जा सकती है, जो अभी 50 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम (Gold price today) के आस-पास रह रही है।

अभी क्या है सोने की कीमत?
रुपये में सुधार के बीच दिल्ली सर्राफा बाजार में गुरुवार को सोने का भाव (Gold price today) 293 रुपये की गिरावट के साथ 49,072 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। एचडीएफसी सिक्यॉरिटीज ने यह जानकारी दी है। बुधवार को सोना 49,365 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। गुरुवार को रुपये की शुरुआती नुकसान लुप्त हो गई और विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार (Foreign currency exchange market)के कारोबार के अंत में भारतीय मुद्रा सात पैसे की तेजी के साथ 75.65 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ।

वायदा बाजार में भी सोने की चमक बरकरार
हाजिर बाजार में मांग कमजोर होने के चलते सोना वायदा भाव गुरुवार को 48 रुपये तक गिर गया। सटोरियों ने भी इसके चलते अपने सौदों में कमी की। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में अगस्त डिलिवरी सौदों में सोना वायदा भाव 14 रुपये यानी 0.03 प्रतिशत टूटकर 48,120 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। इसके लिए 14,339 लॉट का कारोबार हुआ। इसी तरह अक्टूबर डिलिवरी के लिए 5,810 लॉट के कारोबार में यह भाव 48 रुपये यानी 0.1 प्रतिशत घटकर 48,256 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न्यूयॉर्क में सोना भाव 0.20 प्रतिशत बढ़कर 1,778.60 डॉलर प्रति औंस पर रहा।

क्या कहते हैं जानकार?
एंजेल ब्रोकिंग के अनुज गुप्ता कहते हैं कि सोने के दामों में तेजी का ट्रेंड आने वाले समय में भी बरकरार रहेगा। जियोपॉलिटिकल टेंशन और आईएमएफ की ओर से हो रही घोषणाएं इसकी कीमत को और ऊपर ले जाएंगे। बता दें कि आईएमएफ ने कहा है कि कोरोना वायरस महामारी की वजह से बहुत बड़ी मंदी आएगी और इसकी रिकवरी बहुत धीरे होगी। आईएमएफ के अनुसार ग्लोबल आउटपुट 4.9 फीसदी सिकुड़ जाएगा, जबकि विकासशील देशों में विकास दर 3 फीसदी तक कम हो सकती है।

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