भोपालमध्यप्रदेश

CS बैंस का कलेक्टरों को अल्टीमेटम, चंबल प्रोग्रेस वे को लेकर समीक्षा बैठक ली

भोपाल
मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के सोमवार को भोपाल वापस नहीं लौट पाने के कारण मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस ने कोरोना और चंबल प्रोग्रेस वे को लेकर समीक्षा बैठक ली। उन्होंने भिंड, मुरैना और श्योपुर  के कलेक्टरों को कहा है कि चंबल प्रोग्रेस वे के लिए सरकारी जमीन आवंटन की प्रक्रिया पंद्रह दिन के भीतर पूरी करे।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सोमवार को मंत्रालय आने वाले थे। शाम साढ़े चार बजे उनकी मंत्रालय में कोरोना की समीक्षा बैठक थी और पौने छह बजे  चंबल प्रोग्रेस वे की बैठक उन्हें लेना था लेकिन उनका आना स्थगित हो जाने के कारण मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री की नियमित बैठकों के इस क्रम को जारी रखा। उन्होंने दोनो बैठकें ली और जिलों के कलेक्टरों से वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए बात की। कोरोना की समीक्षा के दौरान उन्होंने शिवपुरी और मुरैना जिलों की समीक्षा की और अधिकारियों से पर्याप्त सतर्कता के साथ सैम्पलिंग और इलाज की कार्यवाही करने को कहा। वहीं चंबल प्रोग्रेस वे की समीक्षा करते हुए उन्होंने इस काम को तेज गति से पूरा करने के लिए अफसरों को निर्देशित किया। मध्यप्रदेश को चंबल प्रोगेस वे के लिए जमीन उपलब्ध कराना है। इसमें सरकारी जमीन आवंटन किया जाना है। निजी जमीन का अधिग्रहण किया जाना है और वन भूमि एनएचएआई को नि:शुल्क उपलब्ध कराना है। निजी भूमि के अधिग्रहण में समय लगेगा लेकिन जो सरकारी राजस्व भूमि उपलब्ध है उसके एनएचएआई को ट्रांसफर करने की कार्यवाही अगले पंद्रह दिन में पूरी करने के लिए उन्होंने कलेक्टरों को लक्ष्य दिया है।

प्रदेश में कुल 309 किलोमीटर लंबा मार्ग बनना है। यहां निजी भूमि अर्जन के लिए  लगभग 421 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। वन भूमि की अनुमतियों के लिए भी तीस करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसके अलावा मिट्टी और मुरम पर रायल्टी की छूट दिए जाने से मध्यप्रदेश को 330 करोड़ रुपए का राजस्व नहीं मिल पाएगा। इदस तरह मध्यप्रदेश इस मार्ग के  निर्माण के लिए 781 करोड़ रुए खर्च करेगा। उन्होंने वन, लोक निर्माण और राजस्व विभाग के अधिकारियों को सभी कार्यवाही तेजी के साथ करने को कहा है।

 

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