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MSME सेक्टर को बैंकर्स ने दिया तगड़ा झटका, प्रोग्रेस कमजोर होने की वजह CM को बताएंगे अफसर

भोपाल
कोरोना संकट से जूझ रहे एमएसएमई सेक्टर को बैंकर्स ने तगड़ा झटका दिया है। केंद्र सरकार के आत्मनिर्भर अभियान के लिए तय किए गए प्रावधानों को अनदेखा करते हुए बैंकों ने अब तक दस फीसदी लोन भी इस सेक्टर को नहीं दिए हैं। इस पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बैंकर्स की कार्यशैली पर नाराजगी जताई है और फायनेंस सेकेट्री और बैंकर्स के बीच बैठक कर इसकी वजह तलाशने के लिए कहा है। सीएम चौहान ने नाराजगी जताते हुए कहा है कि अगर इन्हीं हालातों में उत्तरप्रदेश को 21 हजार करोड़ रुपए केंद्र से मिल सकते हैं तो एमपी को अब तक सिर्फ दो हजार करोड़ ही क्यों मिले? इसकी वजह उन्हें बताई जाए। इसके कारण 92611 एमएमसएमई में से कुछ को ही इस योजना का लाभ मिल सका है।

एमएसएमई सेक्टर में आत्मनिर्भर भारत के लिए तय प्रावधानों के बावजूद मध्यप्रदेश के बैंकर्स ने काम नहीं किया है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा है कि संबंधित विभाग बैंकों के साथ नियमित रूप से मॉनिटरिंग कर कार्य में गति लाएं। अन्य राज्यों से प्रगति की समीक्षा कर साफ करें कि हमारे राज्य में इसकी गति धीमी क्यों है? पहले वित्त विभाग और लीड बैंक के भोपाल के प्रदेश स्तर के अधिकारी इसकी समीक्षा करेंगे, फिर जिला स्तर पर नाबार्ड के अफसरों की मौजूदगी में कलेक्टर इसकी रिपोर्ट लेंगे।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि कई प्रकरणों में अनावश्यक स्टांप ड्यूटी वसूले जाने की बातें सामने आई हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। एमएसएमई उद्योग को स्वीकृत ऋण का भुगतान बैंकों द्वारा 45 दिन के अंदर किए जाने का प्रावधान है जिसका पालन किया जाना चाहिए। एमएसएमई प्रमुख सचिव ने बताया कि कुछ प्रकरण बैंकों में 45 दिन से अधिक समय से लंबित है। इस पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी 45 दिन के अंदर ऋण की राशि का भुगतान हो जाए।

एमएसएमई मंत्री ओपी सकलेचा और विभाग प्रमुखों के साथ सीएम की समीक्षा में यह बात सामने आई है कि आत्मनिर्भर अभियान में एमएसएमई सेक्टर को 20 प्रतिशत एक्स्ट्रा लोन देना था। इसके आधार पर जो टारगेट तय हुए उसका 25 प्रतिशत अब तक वितरित हो जाना चाहिए। बैंकर्स को प्रदेश भर के एमएसएमई को 31 हजार करोड़ का लोन देने का टारगेट था लेकिन 2592 करोड़ का ही एडिशनल लोन बैंकों ने दिया है। प्रदेश में कुल 92611 एमएसएमई हैं। इन सबके लिए यह व्यवस्था तय की गई थी। इस तरह बैंकों ने 8.2 प्रतिशत ही टारगेट के मुकाबले लोन दिया है।

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